भगत सिंह : साथियों की नज़र से
क्या हमने सच में भगत सिंह जी को पढ़ा है? भारत में शायद ही कोई ऐसा युवा होगा जिसने Bhagat Singh का नाम न सुना हो। स्कूलों की किताबों से लेकर पोस्टरों, नारों, फिल्मों और सोशल मीडिया तक, भगत सिंह जी आज भी भारतीय युवाओं की चेतना के सबसे बड़े प्रतीकों में से एक हैं। लेकिन एक सवाल हमेशा मन में उठता है — क्या हम वास्तव में भगत सिंह जी को जानते हैं, या सिर्फ उनकी तस्वीर, उनकी टोपी और उनकी शहादत को? हम में से अधिकांश लोग भगत सिंह जी को केवल असेम्बली बम कांड, सॉन्डर्स हत्या और 23 मार्च 1931 की फांसी तक सीमित करके देखते हैं। लेकिन क्या भगत सिंह जी सिर्फ एक क्रांतिकारी थे? क्या वे केवल बंदूक और बम के प्रतीक थे? या फिर उनके भीतर एक ऐसा विचारक भी मौजूद था जो अपने समय के भारत को समझने और बदलने की कोशिश कर रहा था? यही वह प्रश्न है जो Pankaj Chaturvedi जी की पुस्तक “मेरे भगत सिंह” को विशेष बनाता है। यह पुस्तक केवल भगत सिंह जी की जीवनी नहीं लिखती, बल्कि उन लोगों की नज़र से उन्हें समझने की कोशिश करती है जिन्होंने उन्हें करीब से देखा था। उनके साथी क्या सोचते थे? उनके शिक्षक उन्हें कैसे देखते थे? उनक...